गिर गाय

काठियावाड़ (गुजरात) जंगलो की गीर नसल की गाय

geer gaay

गिर गाय गुजरात राज्य के काठियावाड़ (सौराष्ट्र) के दक्षिण में गीर नामक जंगलो में पायी जाती थी। लेकिन आज यह गुजरात के कुछ जिलो सहित देश के कुछ अन्य राज्य जैसे महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्यप्रदेश, कर्नाटक वगेरा।

गिर गाय की शारीरिक विशेषताएं

इनका ललाट (माथा) विशेष उभरा हुआ और चौड़ा होता है, कान लम्बे और लटके हुए होते है तथा सिंग छोटे होते है। गीर नस्ल की गायों का रंग विशेष प्रकार का होता है। इनका मूल रंग सफ़ेद होता है और उसपे विविद रंगो के धब्बे होते है जो सारे शरीर पर फैले रहते है। ये धब्बहे कई गायों में बड़े बड़े और कई गायों में अत्यंत छोटे होते है। ये मध्यम से लेकर बड़े आकर तक पाई जाती हैं। इनका औसत वज़न 385 किलो ग्राम और इनकी ऊंचाई 130 सेंटी मीटर होती है। इस प्रजाति की गाय आकार में बड़ी होती है।

  • गीर गाय की पीठ मजबूत, सीधी और समचौरस होती है।
  • गीर गाय  के कूल्हे की हड्डिया प्राय अधिक उभरी हुई होती है। पंच लम्बी होती है।
  • शुद्ध गीर नश्न की गाय प्राय एक रंग की नै होती। वे काफी दूध देती है।
  • गीर बैल मजबूत होते है, यद्यपी वे कुछ सुस्त और धीमे होते है।
  • उनसे बहुदा गाडी खींचने का काम लिया जाता है। गीर गौ वंश नियत समय पर बच्चे देती है।
  • इनकी दो बियाने में औसतन 12 से 14 महीने का अंतर होता है और ये गाय एक बियाने में औसतन 6500 से 8000 लीटर तक दूध देती है।
  • इस नस्ल की “ रामो ” नामक गौने, जो कांदिवली, मुंबई की “ गोरक्षा मंडली की थी, सादे 5 से सात साल की अवस्था में 444 दिनों के एक बियाने में 6000 लीटर दूध दिया।
  • इसी मंडल की “ प्राग कबीर ” नामक गौने 399 दिन के पहले बियाने में 4269 लीटर दूध दिया तथा बंगलोरे इंस्टिट्यूट की 26 नंबर की गाय ने 280 दिनों के बियाने में 8132 लीटर दूध दिया।

हमारे भारत देश में गाय को गौ माता कह कर पुकारा जाता है। कहा जाता है कि भारत में वैदिक काल से ही गाय का विशेष महत्व रहा है। आरंभ में आदान प्रदान एवं विनिमय के लिए गाय का उपयोग किया जाता था तथा मनुष्य समृद्धि की गणना गौ संख्या से की जाती थी। हिंदू लोग इनकी पूजा करतें हैं। गाय को बहुत पवित्र माना जाता है और गौ हत्या महापापों में माना जाता है।

गाय एक बहुत ही महत्वपूर्ण जीव है। यह सर्वत्र पाई जाती है। गाय का दूध ही नहीं गोमूत्र भी बहुत लाभदायक होता है। जिससे किसी भी तरह की बीमारी से बचा जा सकता है।

गिर गाय के बारेमे ओर जानकारी से पहले

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गिर गाय की कीमत

गीर गाय का दाम कैसे तय करे ?

  • गीर गाय की कीमत का महत्तम आधार दूध उत्पादन क्षमता पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए – मान लीजिए अगर 1 गाय एक दिन में 1 लीटर दूध देती है तो उसका दाम Rs 3,000 से ले कर 5,000 तक होगा।
गीर गाय का प्रतिदिन दूध देने की मात्रा गीर गाय की कीमत
10 लीटर Rs. 30,000 to 50,000
15 लीटर Rs. 50,000 to 70,000
20 लीटर Rs. 70,000 to 90,000

अब आपको थोड़ा बहुत अंदाजा आ गया होगा कि गिर गाय की कीमत कैसे तय करते है। ध्यान रहे की गीर गाय कीमत केवल दूध देने की क्षमता पर ही निर्भर नही करता परंतु,

  • गीर गाय की उम्र
  • गीर गाय ने कितने बच्चे दिये है
  • गीर गाय के माता-पिता के वंश के दूध का रिकार्ड
  • गीर गाय कैन से मौसम मे खरीद करते है
  • गीर गाय बेचने वाले की आर्थिक परिस्थिती
  • गीर गाय की शारीरिक सुंदरता

 

गीर गाय का पालन

गीर गाय रखने की जगह


जब भी आप गौ पालन का सोच रहे हों तो सबसे पहले आपको गाय को रखने के लिए जगह की अव्यश्कता होगी। गाय को रखने के लिए ऐसे जगह का चयन करना चाहिए जो बाजार से ज्यादा दूर ना हो और उस जगह पर ट्रांसपोर्ट की सुविधा भी अच्छी हो भले हीं आप बिज़नेस 2-3 गाय से शुरु कर रहे हों लेकिन जगह का चुनाव ऐसा करे जहा गाय को वहां रख सकें। गाय रखने वाली जगह पर कुछ और चीजो की जरूरत होती है जैसे कि :-

  • उस जगह पर गाय के रहने के लिए केवल ऊपर से शेड बनाया हुआ हो, छोटा छोटा घर बना दें जो की चारो ओर से हवादार हो।
  • जमीन चिकनी और हलकी ढलाव वाली होनी चाहिए तथा जमीन पत्थरो वाली भी हो तो उत्तम
  • रहेगी ताकि पेशाब (toilet) करने के बाद मूत्र का रिसाव पत्थर से निचे की और आसानी से हो सके
  • चिकनी जमीं होने पर गाय के गोबर को उठाने में आसानी होती है।

गीर गाय का उचित खाना

गीर गाय को उचित पोषण देना अनिवार्य होता है अगर उन्हें सही पोषण नहीं मिल पता है तो वे कम दूध का उत्पादन करते है। जिस प्रकार एक व्यक्ति अथवा मेहमान हमारे घर रहने अत है तो हम कुछ दिनों में उसकी पसंद नापसंद सब जान लेते है ठीक उसी प्रकार पशु आहार भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं गीर गाय पालन में। डॉक्टर के मुताबिक़ गीर गौ को उच्च पोषण की आवश्यकता अधिक होती है। गाय के खाने के सामान को रखने के लिए एक स्टोर रूम का भी प्रबंध करना चाइये। ताकि मौसम बदलने पर या मार्किट में उस खाने की कमी होने पर हम तुरंत उपलभ्ध करवा सके।

गीर गाय को देने वाला खाना कुछ इस प्रकार के होते है :-

  • भूसी,
  • नेवारी,
  • सरसों की खल्ली,
  • मक्का की दर्री,
  • हरी साग सब्ज़ियाँ
  • पुआल
  • कुट्टी
  • गाजर
  • मूंगफली के छिलके आदि।

गीर गाय के लिए जल प्रबंधन


जिस जगह पर आप गाय को रख रहे हों ध्यान रहे की उस जगह पर जल का प्रबंध अच्छा होना चाहिए। गायों को नहाने के लिए या फिर उनके जगह की साफ़ सफाई के लिए पानी की बहुत खपत होती है। मगर गाय ज्यादा नहाना पसंद नहीं करती इसलिये उन्हें ज्यादा पानी से नहलाने की जरुरत नहीं होती अन्य था वो अच्छा महसूस नहीं करती और इसका असर सीधा दूध पर पड़ता है।

गीर गाय में पाए जाने वाले रोग

जब कभी भी आप गौ पालन के लिए गाय खरीदें तो रोग मुक्त गाय हीं खरीदें। इसके अलावा गाय का डॉक्टर से संपर्क बना के रखे ताकि जब कभी भी आपकी गाय बीमार हो तो फ़ौरन हीं डॉक्टर को बुला कर उनका इलाज करवा सके। गाय के आस पास से मच्छर, मक्खी या फिर कोई भी कीटाणु जिससे गाय हो हानि पहुँच सकती है उसे दूर करने के लिए गाय के पास धुंआ जला कर रख देना चाहिए। वैसे तो गीर गाय की ये विशेषता है की वह अपनी पूँछ से किसी भी मक्खी या मछर को अपने ऊपर बैठने नहीं देती। जिस जगह पर कोई भी पशु मरा हो उस जगह को फिनाइल या फिर चुने का घोल से साफ़ करना चाहिए।

गीर गाय में पाए जाने वाले रोग कुछ इस प्रकार के होते है

  1. गल घोंटू रोग – ये बीमारी गाय में बरसात के मौसम में ज्यादा पाई जाती है। इस बीमारी में गाय को तेज़ fever के साथ गले में सुजन, सासं लेते वक्त तेज़ आवाज़ आना आदि होता है। इस बीमारी से बचने के लिए गाय को पहले से हीं antibiotics and antibacterial टिके लगा दिए जाते है।
  2. remedy-foot-mouth-disease-homoeopathic-medicineमुंहपकाखुरपका रोग  – यह रोग गायों पर किसी कीड़े के आक्रमण द्वारा होता है। इस बीमारी के हो जाने से गाय की मृत्यु तो नहीं होती है लेकिन गाय सूख जाती हैं। इस रोग में गाय को तेज बुखार (फीवर) हो जाता है। बीमार गाय के मुंह में, जीभ पर, होंठ के अन्दर, खुरों के बीच में छोटे-छोटे दाने निकल आते हैं, जो आपस में मिलकर एक बड़ा छाला का रूप ले लेते हैं। फिर उस छाले में जख्म हो जाता है। खुर में जख्म हो जाने की वजह से गाय लंगड़ाने लगती है। इस रोग का कोई इलाज (ट्रीटमेंट) नहीं है। अतः इस रोग से बचने के लिए इसका टिका पहले हीं गाय को लगवा देना चाहिए। परन्तु हमारे आधुनिक शोधकर्ताओं ने इस परेशानी का निधान ढूंढ लिया है और कहा जाता है। होम्योपैथिक दवा के दुवारा ये बीमारी आश्चर्य जनक तरीके से ठीक हो सकती है।
  3. लंगड़ा बुखारइसमें गाय को 106 डिग्री तक बुखार पहुँच जाता है। इससे गाय कमजोर हो जाती है और खाना पीना भी बंद कर देती है। गाय के पैरो के ऊपरी हिस्से में सूजन हो जाती है जिससे वे लंगड़ाने लगती है। ये सूजन गाय के पीठ पर, या कंधे पर भी हो सकती है।
  4. Matitis-homoeopathic-medicineथनैला  – गाय के थन में होने वाले इस बीमारी से बचने के लिए दूध निकालने से पूर्व और बाद में थनों को किसी Antiseptic Solution से धो लें। वर्ना गाय का थन सूझ के मोटा हो जाएगा और अधिक मोटा होने के कारण उसे बैठने में भी दिक्कत होगी और इसका सीधा प्रभाव उसके दूध पर भी पड़ेगा।

दूध निकालने का सही समय

गीर गाय एक दिन में दो या तीन बार दूध देती है। इसलिए आपको चाहिए की आप नित्य हीं उनका दूध निकाले। दूध निकालने का सही समय होता है :-

सुबह 5 से 7 बजे सुबह में 5 बजे से 7 बजे के बिच का समय गाय का दूध दुहना सही रहता है। इस समय में गाय अच्छी मात्रा में दूध देती है।

शाम 4 से 6 बजेसुबह के बाद शाम के समय में गाय का दूध निकलने से ज्यादा दूध की प्राप्ति होती है। इस तरह से आप एक दिन में 2 बार कर के ज्यादा से ज्यादा मात्रा में दूध की प्राप्ति कर सकते है।

गीर गाय का दूध कैसे निकालें – गाय को हर वक्त बांध कर नहीं रखना चाहिए उन्हें समय समय पर खुली हवा में घांस चढ़ने के लिए छोड़ देना चाहिए इससे गाय स्वस्थ रहती है और दूध भी ज्यादा देती है। गाय के दूध को दुहने का भी एक तरीका होता है। चलिए हम जानते है कैसे गाय का दूध निकला जाता है :-

  • जब कभी भी गाय का दूध दुहना हो तो उन्हें शेड में ले आयें जहां उनके खाने का इन्तेजाम किया हुआ हो।
  • जब गाय भूसी खाने में व्यस्त हो जाती है तो उसी वक्त उसका दूध दुह लेना चाहिए।
  • दूध दुहने वक्त अपने हाँथो में हल्का सरसों तेल लगा लें इससे हांथो पर ज्यादा जोड़ नहीं पड़ता है और दूध भी आसानी से निकल जाता है।
  • जो लोग इस काम में माहिर होते है वो लोग इस तरह से एक बार में कई गायों का दूध दुह लेते है।
  • परन्तु गाय का दूध निकल रहा हो तो तब ध्यान दे के उस समय किसी भी प्रकार की अनवांछित ध्वनि उन्हें सुनाई न दे क्योंकि गाय दर जाती है और दूध रुक जाता है
  • जब तक आप एक गाय को दुह रहें हो तब तक के लिए बांकी की गायों को घांस चढ़ने के लिए छोड़ दें।

गिर गाय के बारे मे कुछ अन्य रोचक बाते

  • गीर नस्ल की गाय का मुख्य स्थान गुजरात प्रांत के दक्षिणी काठियावाड़ के गीर जंगल है। यह गुजरात के जिला जूनागढ़, भावनगर, अमरेली और राजकोट के क्षेत्र में पाई जाती है।
  • यह दुधारू प्रजातियों की दूसरी श्रेणी में गिनी जाती है।
  • सूखे की स्थिति में और कुदरती आपदाओं के समय भी इसके अंदर दूध देते रहने की अद्भुत शक्ति होती है।
  • गीर गाय ब्राजील मेक्सिको अमेरिका वैनेजुएला आदि अनेक देशों में अधिक संख्या में ले जाई गई है।
  • गीर गाय का रंग सफेद और लाल रंग का मिश्रण होता है। पूरी तरह लाल रंग की गाय को भी गीर गाय ही माना जाता है।
  • गीर गाय को यदि अनुकूल परिस्थितियों के अंदर रखा जाये तो यह 25-30 किलो दूध एक में दिन में देने की क्षमता रखती है।
  • ब्राजील ने 1850 में गिर गाय, अंगोल गाय और कांकरेज गाय को भारत से लेकर जाना शुरु किया था। इस समय लगभग 50-60 लाख गिर गाय सिर्फ ब्राजील में ही पाई जाती है।
  • शुद्ध गिर नस्ल की पूरे गुजरात में सिर्फ 3000 गाय ही बाकी रह गई है।
  • 1960 के बाद गुजरात सरकार ने गीर गाय के निर्यात पर पाबंदी लगा दी थी। गुजरात में गीर ने एक बयात में 8200 किलोग्राम दूध दिया है। गुजरात के फार्म हाउस में गीर गाय का एक दिन में 36 किलो दूध देने का रिकॉर्ड दर्ज है जबकि ब्राजील में गिर गाय से 50 किलो दूध एक दिन में लिया जा रहा है।

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68 replies
  1. गंगाधर नारायणराव डाखोरे says:

    गिर गाय महाराष्ट्र में कहा मिलेगी

    Reply
  2. yogesh arun yewale says:

    Rameshji Jay Go mata! Me Yogesh Yewale lonavla, maharashtra se hu. muze gir gay farm chalu karna he. uske liye me 2 gay se chalu karna chahata hu jo 10-12 lit/day dhudh degi. to kya aap muze kech margdharshan kar sakte ho. mere pas ek desi khilar gay he 3-4 liter dudh deti he . mene apke kahi sare video dekhe he or go mata ko acha ahar dena bhi chalu kiya he.

    Reply
  3. JITESH BHANUSHALI says:

    SHU KUTCH NA SUKA VATAVARAN MA GAY NI DEKH BHAR BRABAR THAYI SKSHE …AMAREGIR GAY NO PASHU PALAN VAVYSHAY KARVO CHE TO MAHITI AAPSHO

    Reply
  4. Vikas hundare says:

    Sir Mein vikas pune mai Dehugaon me rhata hu mein rehta hoon main Gopalan kholna karna chahta Hoon mera mobile number 9527041026 hai

    Reply
  5. Saajan Kataria says:

    नमस्कार जी। मैं पँजाब से हूँ। मेरा गौ पालन और खेतीबाड़ी में कोई पारिवारिक पिछोकड़ या अनुभव नहीं है, किन्तु मेरी डेरी फार्म और भारतीय देसी नस्ल की गौ संवर्धन पर कार्य करने की प्रबल इच्छा है।
    मैं आपसे ये जानना चाहता हूँ कि आजकल सभी लोग गिर गाय ही खरीदना चाह रहे हैं। पर पँजाब में डेरी फार्मिंग करने के नाते क्या मुझे गिर की बजाय साहीवाल नस्ल से काम शुरू करना चाहिए? और दूसरा ये कि क्या गिर और साहीवाल की दुग्ध उत्पादन क्षमता में और फैट कंटेंट में बहुत बड़ा अंतर है क्या जो अन्य नस्लों की अपेक्षा लोग गिर पर ही ध्यान केंद्रित करते है।
    और कृपया साहीवाल नस्ल के बारे में बताएं कि इस नस्ल की अच्छी दुधारू गाय कहाँ से खरीदना उत्तम होगा और इसकी प्राइस रेंज क्या है। बहुत बहुत धन्यवाद।

    Reply
  6. Shatrughan kumar says:

    Sir ,मै एक विधार्थी हू। मै लोन लेकर गाय पालन करना चाहता हू. कृपा कर मुझे बताईए कि लोन कैसे मिल सकता है। मेरा मोबाईल न…. 7277556749है।। मै आपका बहुत आभारी रहूगाँ।

    Reply
  7. Manoj kumar jain says:

    गदाधर जी, नमस्कार! गाय के चारा के संबंध में, मेरे मन मे कुछ सवाल उठते हैं, जिनका समाधान सिर्फ आप ही कर सकते हैं, ऐसा मुझे लगता है। आपकी बड़ी मेहरवानी होगी। (1) मेरे पास सिर्फ सूखा चारा है ,हरा चारा नहीं है तो मुझे 10 लीटर दूध देने वाली गाय को कितना सूखा चारा और कितना दाना देना चाहिए। (2) मेरे पास सिर्फ हरा चारा है, सूखा चारा नहीं है तो मुझे 10 लीटर दूध देनेवाली गाय को कितना हरा चारा और कितना दाना देना चाहिए। (3) अगर मैं हाइड्रोपोनिक ग्रीन चारे से हरे चारे की पूरी पूर्ति कर दूं तब मुझे कितना दाना देना होगा। क्योंकि मैनें पढ़ा भी है और सुना भी है कि अगर हरे चारे की खूब अच्छी तरह से उपलब्धता हो तो दाने को कम किया जा सकता है। आपसे पुनः अनुरोध है कि मार्गदर्शन दे।

    Reply
  8. विक्रम व्यास says:

    मैं अमरावती महाराष्ट्र में रहता हूं।
    क्या यहाँ की लोकल गौवंश का दूध बढ़ा सकते है।

    Reply
    • Gadadhar Das says:

      नमस्ते विक्रम जी,
      किसी भी देशी गौ वंश का दूध जरूर बढ़ा सकते है लेकिन कुछ बातो की जानकारी भी होनी आवश्यक है।
      1. गाय के वंश के बारे मे जानकारी होना जरूरी है।
      ज्यादातर हम यहि जानते है की गिर गाय, शाहिवाल गाय या अन्य दूध देनेवाली देशी गाय लाएंगे और अच्छा खिलाईए तो वह दूध देगी लेकिन वह इतना ही दूध देगी जितनी उसकी केपेसिटी होगी। केपेसिटी जानने के लिए उस गाय का वंश या माता का दूध एवं पिता की माता का दूध रेकोर्ड जानना जरूरी बनता है। गाय के दुध की नस या गाय का अडर देखकर भी थोडा बहूत जान पाते है लेकिन वंश के रेकोर्ड से पूर्णतया जानकारी मिलेगी। यदि गाय के वंश मे दूध का कोई रेकोर्ड नही है तो आपकी पास जो गाय है वह उसके केपेसिटी से ज्यादा दूध नही देगी।
      2. गाय का खानपान
      यदि गाय के वंश मे दूध का अच्छा रेकोर्ड है तो दूध कम देनेका एक कारण गाय का खान-पान भी होता है। ज्यादातर देखा गया है की गाय को धेहुँ की भूस चोकर, हरा चारा, गुड का पानी या अन्य कुछ चिजे मिक्स करके खिला दिया जाता है जो न केवल गाय को कमजोर करता है बल्कि आने वाले गाय के वंश को भी कमजोर बनाता है। एसे पोषण बिना के चारे से गौ वंश का दूध दो-चार लिटर से बढ़ नही सकता ओर आज वहि हो रहा है।
      ओर भी कुछ चीजे है जो दूध को कम कर सकती है। यदि इन सबकी जानकारी नही है तो हमारा प्रयास सफल नही हो पाएगा।
      आभार

      Reply
  9. रवि says:

    सर् जी में मध्यप्रदेश में रहता हूं और दूध की ढेरी खोलना चाहता हु कृपया मार्गदर्शन करें और कोनसी गाय हमारे वातावरण में सही से दूध दे पाएगी और अच्छे से रह पाएगी

    Reply
  10. 9660351823 says:

    नमस्कारम जी राम राम सा।
    आपने अजमेर किशनगढ़ की बोला हैं यहाँ बहुत मात्रा में लाल गो माता हैं जो हट्टी कट्टी लम्बी छोड़ी हैं। पर ये कैसे पता करे कि ये शुद्ध गिर गो हैं या कोई भी गो माता का कैसे पता करे की ये नस्ल गो माता की शुद्ध हैं। किसी विदेशी जानवर से गो माता का क्रोश ना हुआ हो। पीठ पर गुमद से तो सीधा जान सकते है। पर भाई श्री गोपाल सुतारिया जी जो की गुजरात अहमदाबाद में ही है ने बताया कि गो माता से अगर कोई विदेशी जानवर से क्रॉस हो गया और उस गो माता की आने वाली नस्ल के साथ देशी नंदी से क्रॉस होता जाता हैं तो फिर से उसका गो का शरीर देशी गो गोमाता जेसा हो जाता हैं। आप कृपया मार्गदर्शन करे।

    Reply
  11. Amit Pandey says:

    श्रध्देय श्री गदाधार जी …..सादर प्रणाम
    मैं अमित पाण्डेय …प्रयागराज /इलाहाबाद /यूo पीo से हूँ …….मैंने बहुत ही ध्यान से आपके विचारों व जानकारियों का अध्ययन किया जो बहुत ही श्रेष्ठ है ।
    महोदय मेरे पिता श्री की उम्र 67 वर्ष है मैंने बहुत ही बचपन से देखा है कि उनका गौ पालन में विशेष रुचि रही है ….अभी 10 दिन पहले ही उनके द्वारा पाल्य एक साहीवाल गाय बीमारी के कारण एकादशी को अपने लोक (गोलोक ) को चली गई …उस दिन से मेरे पिता श्री बहुत ही उदास व मौन रहते है …..लगभग 3 माह पूर्व उन्होंने एक गिर गौवंश की इच्छा मुझसे कहीं थी ।
    कुछ ही दिनों बाद मेरे पिता जी का जन्मदिन है …अतैव मेरे मन में ये विचार है कि मैं उनके जन्मदिवस पर एक उत्तम कोटि की गिर गाय उनको भेंट करूं ….मुझे पूर्ण आशा है कि उनको अतीव प्रसन्नता होगी ….इस सम्बंध में कृपया मेरा मार्गदर्शन करें कि मुझे उत्तम कोटि एक गिर गाय कहाँ से मिल सकेगी …मुझे जो भी परिश्रम या प्रयास करना होगा करूँगा …कृपया मार्गदर्शन करें ।
    शुभकामना सहित
    अमित पाण्डेय ….श्री प्रयाग

    Reply
    • Gadadhar Das says:

      नमस्ते अमित जी,
      प्रणाम
      आपसे फोन पर बात करके बड़ी प्रसन्नता हुई। गिर गाय के पालन के प्रति अापके प्रेम को देखकर बड़ा आनंद हुआ।
      हमारा प्रयास रहेगा आपको यथायोग्य सहयोग करने का।
      आभार।

      Reply
      • amit पाण्डेय says:

        गौ सेवा सामान्य व्यक्ति के वश की बात नही …आप लोगों के द्वारा किये जा रहे प्रयास तो सिर्फ गोपाल ही कर सकते है …इसलिए आप सभी पूज्यनीय है
        साधु …साधु ….साधु

        Reply
  12. hari om singh says:

    श्रीमान जी हम बाँदा जिला उत्तर प्रदेश से है हमारे यहाँ गाय कौन सी सही होगी

    Reply
    • Gadadhar Das says:

      नमस्ते हरि ओम जी,

      वैसे उत्तर भारत के लिए हरियाणवी नश्ल की गौवंश या साहिवाल गाय श्रेष्ठ रहेगी। कई गौशाला गिर गौ पालन कर रही है केलिक गीर गाय प्राप्त करके उसे आपके वातावरण मे सेट करना समय लेगा। यही नही, आप चाहे गिर गाय से डेरी फार्मिग करे या साहिवाल या हरियाणवी, कुछ व्यवहारीक बाते जरूर जान लेनी चाहिए। कृपया निचे दि हुए कोमेन्टों को ध्यान से पढ़े ओर सही चुनाव करे। यदि आपको ओर कोई समस्या का समाधान चाहिए तो यहा पूछ सकते है। आपको हर संभव सहयोग का प्रयास करेंगे।
      आभार

      Reply
    • Gadadhar Das says:

      नमस्ते अजय जी,

      हम आपके गाय आधारित डेरी फार्मिंग करने के विचार की सराहना करते है लेकिन सोचने और पेपर पर केल्कुलेट करने पर जितना लाभकारी एवं फायकेमंद मालुम पड़ता है उतना व्यवहारीता मे नही। कृपया समय निकालकर निम्न कोमेंटो को ध्यान से पढ़े ओर उचित निर्णय ले। आगे ओर कोई प्रश्न हो तो बिना संकोच यहा पूछ सकते है।

      आभार

      Reply
    • Gadadhar Das says:

      नमस्ते विनोद जी,

      गिर गाय का दूध देने का समय सामान्यतया 6-7 महिना होना चाहिए। यह समय की गिनती बच्चे के जन्म से करनी होती है। जैसे नीचे कुछ कमेंट मे बताया है, कुछ गिर गाय बच्चे को जन्म देने के समय तक दूध देती है जो ठीक नही है। बच्चे देने के बाद, 2-3 महीने मे गाय वापस गाभिन होती है तब उसे अपने शरीर को निर्वाह, गर्भ मे पल रहे बच्चे के विकास एवं आपके डेयरी फार्म के लिए भी दूध देना होता है। यदि यही परिस्थिती रही तो इसका सीधा प्रभाव बच्चे के विकास, अगले बियाणे के समय के दूध और गाय के स्वास्थ्य पर बुरे दूरगामी प्रभाव दिखेंगे।

      आभार

      Reply
  13. ओमप्रकाश शर्मा says:

    मै भिवानी हरियाणा से हु मुझे गिर गाय चाहीये क्या मुझे मिल सकती है अगर हा तो क्या करना पड़ेगा

    Reply
    • Gadadhar Das says:

      नमस्ते ओमप्रकाश जी,

      गिर गाय जरूर मिल सकती है लेकिन हमारा सुझाव है की अगर आप हरियाणवी गो वंश या साहिवाल गो वंश का पालन करना उचित रहेगा। साहिवाल गाय एवं हरियाणवी गाय आपके वातावरण, पानी, खाना एवं भाषा के परिचित है जबकी गिर गाय गुजरात से है। यदि आस-पास से गिर गाय मिल सके तो ठीक है, नहीं तो दूर से लाने मे कई समस्याएँ है।

      आभार

      Reply
      • Anil Tiwari says:

        I am from amarkantak, Madhya Pradesh, want to know the gir cows survive in our climate or not..and which cows survive in our climate?

        Reply
        • Gadadhar Das says:

          Dear Anil Tiwari ji,

          Thank you so much for your valuable comments.

          Yes, Gir Cow can easily adopt climate of Madhya Pradesh. But when you move Gir Cow for first time then they need some time to get use to your local food, water and language. These rules shall apply to any Desi Cow Breed (Indigenous Cow Breed).

          Explore more about: Cow Dairy Farming

          If you need any further information, kindly let us know here.

          Regards,
          Gadadhar Das

          Reply
  14. Kartik Vaghela says:

    Sir geer gaay din me kitna kg chara khati he ……or jyadatar chare me kya hota he ……..chare ki anumanit per kg kitni price padti he ?

    Reply
    • Gadadhar Das says:

      नमस्ते कार्तिक जी,

      1. गिर गाय दिन मे कितना चारा खाती है
      गोवंश को खिलाने के अलग-अलग तरीके हैं। कुछ गो पालक या पशु पालक आधुनिक पद्धति के अनुसार, उनके वजन के हिसाब से चारा खिलाते हैं। जबकि हमारे वैदिक परंपरा के अनुसार देखा जाए तो गोवंश को स्वतंत्रता देनी चाहिए कि उसे कितना खाना है। उदाहरण के तौर पर हमारे सामने दो व्यक्ति खड़े हैं। दोनों की उम्र 25 साल है, ऊंचाई भी एक समान है, लेकिन एक का वजन 50 किलो है और दूसरे का वजन 85 किलो है। सीधी सी बात है कि 85 किलो वाला व्यक्ति को आधुनिक पद्धति के अनुसार मान लो हर रोज की 10 रोटी खानी चाहिए और 50 किलो वजन वाले व्यक्ति को पांच रोटी खानी चाहिए। लेकिन आपने देखा होगा की मोटे व्यक्ति अपने वजन के अनुपात की जगह केवल दो रोटी ही खाते हैं, जबकि कम वजन वाला व्यक्ति 5 की जगह 12 रोटी खाता हो सकता है। जरूरी नहीं है कि जो मोटा हो वह वजन के अनुपात में ही खाना खाएं जबकि योग्य यही है कि उसे जितनी भूख हो या योग्य लगे उतना खाए।

      ऊपर के उदाहरण से हमें यही समझना और सीखना चाहिए कि गोवंश को स्वयं तय करने दें कि उसे कितना खाना है। आपने जितना चारा उसके सामने रखा है, अगर वह पूरा खा जाती है तो उसे ही मेंटेन रखें और बच जाता है तो दूसरे दिन । साथ ही साथ ही कम पड़ जाता है तो दूसरे दिन थोड़ा सा बढ़ा दीजिए।

      2. गिर गाय के चारे मे क्या होता हैः

      गिर गाय को सूखा और हरा दोनों प्रकार के चारे जैसे दूसरा गोवंश खाता है उसी तरह ही खिलाया जाता है। गीर गाय खरीदते समय यह जरूर जान ले कि उस जगह पर उसे क्या खिलाया जाता है। कई बार ऐसा होता है कि आप जो चारा खिलाना चाहते हैं वह उसने कभी खाया ही नहीं या उस प्रकार के चारे की आदत ना हो। कभी ऐसा भी होता है कि जिस जगह से आप लेकर आ रहे हैं वहां पर आप जो खिला रहे हैं उससे भी अच्छा खाना दिया गया हो तो वह आपके यहां खाने में नखरे करेगी। बाकी तो आप जिस प्रकार से जवार, मक्का, बाजरा, जीन्जवा घास, मूंगफली की भूसी, सोयाबीन की भूसी, गवार, गाजर, चुकुंदर, गन्ना वगेरा अलग-अलग प्रकार के सुख एवं हरे चारे खिला सकते हैं।

      3. गिर गाय के चारे की अनुमानित कीमत क्या होगीः

      खेती की सुविधा ना होने के कारण बाजार से या तो किसी और के पास से चारा खरीद कर लेकर आने की बात है तो यह बात का आप जरूर ध्यान रखें, एक बार धान का बीज तैयार हो जाने के बाद बचे हुए पौधे में इतने पोषक तत्व नहीं बचते जीतना बीज में दूध भरने के समय होते हैं। बाजार से जो आप खरीद कर लेकर आएँगे वह अनाज तैयार हो जाने के बाद बचा हुआ पौधा होता है। इसमें इतने पोषक तत्व नहीं होते जितने गोवंश के लिए जरूरी है। इसका मतलब यह हुवा की कीमत देने पर भी हमे पोषक तत्व युक्त चारा नहीं मिलता। श्रेष्ठ यही है की सुविधा होने पर खुद ही चारा उत्पादित करे जिससे पूर्ण पोषण युक्त चारा गो वंश को खिला सके।

      सामान्यतया, अलग-अलग जगह पर चारे की कीमत अलग अलग होती है। उसमे आने जाने का जोड़ दिया जाए तो कीमत में काफी फर्क आ जाता है। सूखा घास चारा तो आप पूरे साल भर के लिए भर सकते हैं लेकिन हरा चारा आपको खुद ही उत्पादित करना पड़ेगा या बाजार से जिस कीमत में जो समय उपलब्ध हो खरीद के लाना पड़गा। ज्यादातर जो मार्केट में मिलता है वह, ₹70 से ₹80 प्रति 20 किलो तक का हरा चारा हो सकता है।

      आखिर मे इतना ही कहेंगे की, एक गाय पर प्रति दिन खान-पान के खर्च का आधार आपकी लोकल स्थिति परिस्थिति पर ही निर्भर करेगा। वह प्रति गौ 150 रूपे भी हो सकता या गाय चरने जाती हो तो 50 रूपे भी हो सकता है। इसके लिए लोकल गो पालन करनेवाले व्यक्ति से मिलकर पता करना ही ज्यादा योग्य रहेगा।

      आभार

      Reply
    • Gadadhar Das says:

      नमस्ते कार्तिक जी,

      यदि आप गिर गाय का संवर्धन कर रहे हैं तो उचित यही रहता है कि बच्चा देने के बाद गाय से 6 से 7 महीने तक ही दूध लेना चाहिए। बाद में गौवंश के खुद के शरीर के विकास एवं गर्भ में पल रहे बच्चे का ठीक से विकास ठीक हो उसके लिए मेन्ड्रायुअली ड्राई करना उचित रहता है। कहीं-कहीं बच्चा जनने के दिन तक भी गाय का दूध लेते रहते हैं या गोवंश मातृप्रेम के कारण दूध देती रहती है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि इन सब चीजो को समझ कर उसे उचित समय पर ड्राई की जाए। ऐसा करने से आने वाला गोवंश सशक्त एवं दीर्घायु पैदा होगा साथ ही अगली बार के वेतर में गौ के दूध एवं स्वास्थ्य में भी प्रगति दिखेगी।

      आभार

      Reply
  15. Vinayak Gajghat says:

    १) मैं गोंदिया महाराष्ट्र से हु मुझे उत्तम दर्जे की गिर गाय कहाँ से उपलब्ध होगी?
    २) प्रतिदिन १५ लीटर दूध देनेवाली गाय की किंमत क्या होगी?
    ३) जानवर बूढ़ा या दूध न देनेवाला हो तब भी उस जानवर से इतना लाभ कमा सके कि उस जानवर के भरणपोषण का खर्च निकल सके उसका उपाय बताये।
    ४) गिर गाय से उत्तम दर्जे के बच्चे पैदा करने के लिए उत्तम दर्जे का गिर सांड कहाँ से मिलेंगा और कितनी किंमत होगी?

    Reply
    • Gadadhar Das says:

      नमस्ते विनायक जी,

      1. गिर गाय कहा से प्राप्त होगीः

      गिर गाय गुजरात के काठियावाड़ (सौराष्ट्र) में पाई जाती है। यहा पर ऐसे कई जिले हैं जहा अलग-अलग गिर गाय के ग्रेडिंग फॉर्म, गिर गौशाला या व्यक्तिगत तौर पर गिर पालने वाले फार्मर से प्राप्त हो सकती है। गुजरात के कुछ अन्य स्थानों पर भी गिर गाय पाई जा सकती है। भारत के कुछ अन्य राज्यों में भी गिर गाय देखने को मिलती है, जैसे महाराष्ट्र (धूलिया या पुणे के आजू-बाजू शुगर फैक्ट्री के पास), मध्य प्रदेश, राजस्थान (किशनगढ़ और अजमेर)। कुछ मात्रा में गिर गाय छत्तीसगढ़, यूपी, हरियाणा, पंजाब, तमिलनाडु, कर्नाटक जैसे राज्यों में भी देखी जा सकती है।

      आपका प्रश्न है कि उत्तम दर्जे या शुद्ध नस्ल की गिर गाय कहां मिल पाएगी तो जवाब है कि यह खास करके गुजरात के कुछ प्रख्यात गिर गाय के बिड्रर को पास आज भी उपलब्ध है। ईन्होने ब्राजील के साथ भी भूतकाल में बड़े पैमाने पर आदान प्रदान किया है, जैसे भावनगर के प्रदीपसिंह रावल, राजकोट के जसदन तालुका के दरबार साहब सत्यजीतसिंह खाचर, गोंडल के पास भुनेश्वर पीठ, कुछ स्वामिनारायण गौशाला वगेरा। यह सभी महानुभाव काफी समय तक ब्राजील से काम किए हैं उनके गिर ब्रीडिंग फॉर्म में गिर गाय का संवर्धन करके उनके एम्ब्रोई, सीमन या अच्छे गाय एवं गिर नंदी को भूतकाल में ब्राज़ील भेजा है। यहा समस्या केवल इतनी है कि यह सभी व्यक्ति के पास से उत्तम दर्जे के गिर गोवंश प्राप्त करना कठिन है। प्रदीप सी रावल से आपको उत्तम से उत्तम गिर नंदी का सीमन प्राप्त हो पाएगा। जब की भुनेश्वर पीठ या दरबार साहब सत्यजीतसिहं खाचर जी के पास से गिर गोवंश प्राप्त हो सकता है, जिसके लिए बड़ा वेटिंग लिस्ट होता है। ओर भी कुछ स्वामिनाराणय संस्थान द्वारा संचालित गौशाला से भी गिर गाय प्राप्त हो सकती है।

      2. प्रतिदिन १५ लीटर दूध देनेवाली गाय की किंमत क्या होगी?

      प्रतिदिन 15 लीटर दूध देने वाली गाय को प्राप्त करना इतना आसान नहीं है। इसके लिए आपको कई जगहों पर घूमना पड़ेगा और इन स्थानों पर आपको उनके वंश के रिकॉर्ड प्राप्त करने का प्रयास करना पड़ेगा।
      ऐसा नहीं है कि आपने 15 लीटर की गाय मांगी और सामने वाले ने बेच दी। और भी काफी इन्फोर्मेशन आपको जाननी पड़ेगी क्युकी कई लोग चिटींग भी करते है। सारी चीजें जाचने करने के बाद ही भाव तय होता है। 15 लिटर दूध देनेवाली गिर गाय की कीमत करीब 60,000 से लेकर 1,50,000 तक हो सकती है। केवल तीन टाइम का दूध का एवरेज ही काफी नहीं होता है। यह भी देखना पड़ेगा कि उस गाय को कभी भूतकाल में थनैला रोग (Mastitis) वगैरा की बीमारियां न हुई हो। उनके भाई-बहन को भी देखने को मिल सके तो ओर भी अच्छा है जिससे आपको गो वंश के बैकग्राउंड समझने मे आसानी रहे।

      3. जानवर बूढ़ा या दूध न देनेवाला हो तब भी उस जानवर से इतना लाभ कमा सके कि उस जानवर के भरण पोषण का खर्च निकल सके उसका उपाय बतायेः

      कोई भी देसी गाय यदी दूध नहीं दे रही है फिर भी गोमूत्र और गोबर जरुर देगी। अगर आप चाहते हो कि हमेशा कुछ ना कुछ आमदनी बनी रहे तो इसी गोमूत्र और गोबर को कृषि के साथ जोड़कर कुछ उत्पाद बनाने चाहिए जैसे कंपोस्ट खाद, केंचुआ खाद, जीवामृत, घनामृत और गोमूत्र से दशपर्णी अर्क वगेरा बनाकर बेच कहते हैं। अन्य उत्पाद जैसे अंगराग साबुन, धूपबत्ती, फिनाइल, जैसे घरेलू उपयोग में आने वाली चीज वस्तुएं बनाकर गौशाला को स्वनीर्भर बनाया जा सकता है। यह सब चीजें कैसे बनाई जाए वह आपको बहुत ही आसानी से इंटरनेट के माध्यम से या तो कई जगहों पर फ्री कार्यशाला से भी प्राप्त हो पाएगी। एक बात का आपको ध्यान रखना है, जब तक गौ को कृषि से नहीं जोड़ा जाएगा तब तक गोपालन करना काफी मुश्किल है। क्योंकि गाय को खाना चाहिए और जमीन को भी खाना चाहिए तो गाय जो अपना गोबर और गोमूत्र देती है वह कृषि के उपयोग में आता है और कृषि की जो उपज होती है, उसकी कनिष्ठ चीजे गाय के खाने के उपयोग मे आती है। इसलिए आप कुछ ईस प्रकार की चिजे बनाकर कृषि एवं समाज में इसका वितरण करके एक आमदनी का साधन खड़ा कर सकते हैं।

      4. गिर गाय से उत्तम दर्जे के बच्चे पैदा करने के लिए उत्तम दर्जे का गिर सांड कहाँ से मिलेंगा और कितनी किंमत होगी?

      यह प्रश्न पूछने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। आजकल ज्यादातर लोग 15 से 20 लीटर दूध देने वाली गीर गाय कहां से मिलेगी और गिर गाय की कीमत क्या, जैसे ही प्रश्न पूछते हैं लेकिन आगे उसका संवर्धन कैसे हो पाएगा और ज्यादा श्रेष्ठ गिर गोधन कैसे बढ़ सकता है उस पर विचार नहीं करते। परिणाम यह आता है कि आगे कम दूध उत्पादन करने वाली गीर गाय या तो गोवंश पैदा होता है। इस को पालना एक छोटे कृषक के लिए बहुत कठिन होता है, परिणाम स्वरुप वह पांजरा पोल में या तो रोड पर आ जाता है।

      गुजरात में प्रदीपसिंह रावल इस प्रकार के अच्छे गिर के नंदी का संवर्धन करने के लिए प्रख्यात है। ओर भी कुछ लोग हैं जो इस प्रकार के उत्तम नस्ल के गिर नंदी का संवर्धन कर रहे हैं, जो कि इनकी कीमत है लाखों में होती है। गिर नंदी की पसंदगी करते समय आपको आपके गोवंश के दूध के प्रमाण को भी ध्यान मे रखना है। यदि आपका गोवंश 10 लीटर प्रतिदिन की एवरेज पर चल रहा है तो उसके लिए 25 या 30 लीटर दूध देने वाले गीर गोवंश के नंदी से संवर्धन नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह बहुत बड़ा जम्प कहलाएगा। शुरुआत में 10 लीटर दूध देने वाली गाय के लिए 15 लीटर के आसपास रिकॉर्ड वाला नंदी से संवर्धन करना ज्यादा उचित रहेगा और भविष्य में उसके द्वारा उत्पन्न हुई बछडीं को उसके भी उपके अच्छे गीर नंदी से संवर्धित करके उत्तम गौ वंश को आगे बढ़ाना उचित रहेगा।

      15 मीटर के आजू-बाजू के रिकॉर्ड वाला नंदी करीबन 1 से 2 लाख की रेंज में प्राप्त हो पाते है। नंदी की पसंदगी करते समय भी कुछ चीजों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है। एसा नही करने पर आपके गो वंश के संवर्धन की जगह बहुत बड़ा नुकसान होगा। (गीर नंदी की पसंदगी के लिए)

      यदि इन चीजों में आपको और भी कोई जानकारी चाहिए तो कृपया यहां पर बताइए हम जरूर से उसका उत्तर देने का प्रयास करेंगे।

      आभार।
      गदाधर दास
      8979892588

      Reply
    • Gadadhar Das says:

      नमस्ते अभिनव जी,

      आपका प्रश्न बहुत-बहुत महत्वपूर्ण है।

      प्राय देखा गया है कि देश के अलग-अलग राज्यों में जैसे महाराष्ट्र, हरियाणा, यूपी वगेरा गोवंश को क्या पशुओं को चावल या गेहूं की भूसी प्रचुर मात्रा में खिलाई जाती है। क्योंकि गांव में लोगों के पास इतना हरा चारा उपलब्ध नहीं होता इसलिए ज्यादातर लोग चावल या तो गेहूं की भूसी के ऊपर गुड़ का पानी या जॉब कर यह थोड़ा सा हरा घास मिलाकर गोवंश को या तो पशुओं को खिलाते हैं। परिणाम यह आता है कि यह सब खुशियों में ऐसे कोई भी पोषक तत्व नहीं है जो उनके शरीर को पोषण प्रदान करें उल्टा इन में से कुछ जो है उनके दूध को सुखाने का काम भी करते हैं। पोषक तत्व ना मिलने के कारण कमजोर होता जाता है गर्भ में अगर बच्चा है तो उसका विकास ठीक से नहीं होता अंतर गोवंश का दूध आशा से भी नीचे 2 से 4 लीटर के भी अंदर हो जाता है। गोवंश का दूध कम हो जाता है तो उसको और भी निम्न कक्षा का आहार दिया जाता है जो परिणाम स्वरुप वंश और भी कम दूध देने लगता है।

      बहुत सारे गो पालक गेहूं-चावल, सोयाबीन, सूरजमुखी जैसी फसको की भूसी ज्यों की त्यों गाय, पशु या जानवरों को खिला देते हैं। इससे गाय, पशु या जानवरों की सेहत पर विपरीत परिणाम का स्वरूप वह बीमार पड़ते हैं। लेकिन इसपर कुछ प्रक्रिया कि जाए तो उसका स्वरूप सुधार कर गाय यातो पशुओं को दिया जाए तो इसका इतना बुरा असर नहीं होगा और अच्छा परिणाम भी देगा।

      गेहूँ का काडः
      गेहूं की फसल तैयार हो जाने के बाद उसकी काड को कहां तो लोग फेंक देते हैं, जला देते हैं या तो कागज बनाने वाले कारखाने को बेच देते हैं, तो कुछ जगह वह गाय या जानवरों का चारा बता कर खिलाते हैं।

      पोषक तत्वः
      1) 3% प्रोटीन और 40% पाचक पोषणमूल्ये
      2) कार्बोदक का प्रमाण 70%
      3) लिग्निन और सिलिकॉन का प्रमाण अधिक होने से जानवरों के या तो गोवंश के शरीर में इस का सहयोग होकर कैल्शियम ऑक्जलेट तैयार होता है। वह पेशाब से बाहर फेंके जाते हैं।

      चारे की कमी के कारण या तो मजबूरी में गोपालक या तो पशुपालन करने वाले व्यक्ति सीधी ही गेहूं की भूसी या तो काड को गोवंश को या तो पशु को खिला देते हैं। लेकिन इसके ऊपर निम्न नदियों की प्रक्रिया करने से पैसों की बचत हो कर दूध उत्पादन में बढ़ावा मिलता है एवं गोवंश और पशुओं के पाचन योग्य बनता है।

      पक्रियाः
      यह प्रक्रिया बहुत ही आसान है। इसमें काड या भूसी जानवरों को खिलाने से पहले पानी में भिगोकर रखते हैं। 1 किलो काड को 1 लीटर पानी में भिगोने पर उसमें उपलब्ध आॅक्जलेट, सिलीका और राख प्रमाण कम होता है। नरम होकर उसकी पाचकता बढ़ती है तथा शुष्क पदार्थ का प्रमाण घटता है।

      तो मित्रों आप के आजू-बाजू जो भी गोपाला या पशुपालन कर रहे हैं उनको यह सुझाव दें कि इस प्रकार से प्रक्रिया किया हुआ काड या भूसी खिलाएं। कुछ नहीं तो उनके स्वास्थ्य को नुकसान तो ना पहुंचे। आज हमारी अज्ञानता के कारण हमारा गोवंश अपनी उत्पादक शक्ति खो चुका है। निम्न कक्षा का चारा खिलाकर उच्च गुणवत्ता वाला दूध प्राप्त कैसे हो सकता है? आज जो गोवंश हमें रास्ते पर घूमते हुए नजर आते है वह इस का ही एक परिणाम है।

      यदि इस विषयवस्तु पर आप ओर कुछ जानना चाहते हो तो कृपया यहाँ अपना सुझाव रखे।

      आभार

      Reply
  16. कुन्दन कुमार पाठक says:

    सर्
    गिर गाय की प्रजाति बिहार या झारखंड में कहाँ मिलेंगी।
    कृपया मार्गदर्शन करे ।
    क्या साहीवाल गाय में गिर का सीमेन दिया जा सकता है और क्या उसकी गुणवत्ता पर कोई प्रभाव तो नही होगा ?

    कुन्दन कुमार
    झारखण्ड
    9431119726

    Reply
    • Gadadhar Das says:

      नमस्ते कुन्दन कुमार जी,

      आपका प्रश्न बहुत ही महत्वपूर्ण है। इस प्रकार के प्रयोग कई सालों से होते रहे है और आज भी अज्ञानता वश चल रहा है। परिणाम यह है की आज हमारे पास शुद्ध नस्ल के गौ वंश के 125 से भी ज्यादा प्रजातियों मे से 25 से भी कम बची हुई है।

      गिर प्रजाति की गाय वैसे झारखंड या बिहार में नहीं पाई जाती। जैसे हमने आगे की भी कुछ उत्तर में बताया कि गिर गाय गुजरात के सौराष्ट्र या काठियावाड़ प्रदेश में पाई जाती है। जिन जिलों में गिर पाई जाती है वह है, वांकानेर, भावनगर, सुरेंद्रनगर, अमरेली, राजकोट, जूनागढ़, जामनगर जैसे जिलों में गिर गाय पाई जाती है। इसके सिवाए गीर गाय राजस्थान एवं महाराष्ट्र के भी कुछ इलाकों में है जो की कुछ दशको पहले गुजरात से माइग्रेट हुई है, कुछ हद तक डाउनग्रेड भी हुई है या लोकल ब्रेड के साथ उसका क्रॉस हुआ है। झारखंड में अगर कोई लेकर गया हो तो उनके पास से मिल सकती है या आज-बाजू के राज्य में भी कोई लेकर गया हो तो उनसे भी प्राप्त हो सकती है।

      आपका दूसरा प्रश्न है कि साहिवाल गाय में गिर गाय का सीमन डाल सकते हैं या नहीं। कुछ लोग इस प्रकार का प्रयोग करते हैं जो करना नहीं चाहिए क्योंकि परिणाम हमारे हाथ में नहीं होता। कई बार इस प्रकार के प्रयोग करने का परिणाम बहुत ही कहानीकार साबित होता है, जैसे कि माता का बछड़े के साथ ही मर जाना या बछड़ा जनने के बाद माता की मृत्यु हो जाना या बच्चे का मां के गर्भ में ही मरना। कई बार हमारी नादानी या तो अज्ञानता के कारण 200 किलो की गाय में 400 किलो के नंदी का या तो दूसरे कोई गोवंश का सीमन डालने से बच्चा इतना बड़ी साइज का हो जाता है कि मां के गर्भ में नहीं रह पाता। ऐसे केस में बच्चा तो मरता ही है साथ में कई बार माता का भी मृत्यु होता है। सब कुछ सही चला तो भी कोई गारंटी नहीं है कि आने वाला बच्चा ज्यादा दूध देगा या कम। ज्यादा गिर होगा या ज्यादा साहिवाल। यह सब कुछ प्रकृति के हाथ में होता है ना कि हमारे। कृपया ऐसे प्रयोग से बचना चाहिए क्योंकि परिणाम कुछ भी आ सकता है। हो सके तो साहीवाल में सही वालों का ही सीमेन का प्रयोग करना चाहिए नही किसी और नस्ल जैसे HF Cow, जर्सी काउ या और भी कोई देसी गौ वंश।

      आप से हमारी नम्र विनती है कि एक ही प्रकार के गोवंश को रखें और उसी गोवंश के नंदी या तो अच्छे बिजदान से उनका संवर्धन करने का प्रयास करें। साहीवाल गाय के साथ गिर गाय या तो गिर गाय के साथ साहिवाल गाय मिक्स करने से अच्छा परिणाम मिले या ना मिले लेकिन एक अच्छी नस्ल की गाय आगे बढ़ने से रुक जाएगी और मिक्स ब्रीड आगे जाएगी जो नाही शूद्ध गिर गाय कहलाएगी या साहिवाल।

      आभार

      Reply
  17. Pankaj Kumar says:

    गिर बछिया कितने दिनों के बाद पहली बार गर्म होती है या पाल खाती है

    Reply
    • Gadadhar Das says:

      नमस्ते पंकज जी,

      आपका प्रश्न बहुत ही महत्वपूर्ण है। हमने कइ गोपाल देखे है जो बहुत चाव से गाय की बछड़ी को प्रोटीन युक्त आहार खिलाते है लेकिन आगे जाकर बड़ा नुकसान गौ वंश को एवं गो पालक को भी भुगतना पड़ता है। हमे यह जान लेना चाहिए की 12 या 15 से भी ज्यादा स्वस्थ्य बच्चे देने वाली स्वस्थ्य गीर गौ माता का संवर्धन करना है या कम उम्र के गाभिन होकर 5 या 6 कमजोर बच्चे देकर बूढ़ी होने वाली गाय?

      गिर गाय की बछड़ी का वजन एवं उम्र यह दोनों को ध्यान मे रखकर निश्चित किया जाता है कि उसे कब गाभीन करे। कुछ लोग उत्साहित होकर गीर गाय की बछड़ी को अच्छा अच्छा पोषणयुक्त आहार खिलाते है। परिणाम यह आता है की उसका वजन 200 किलो तक 2 वर्ष की उम्र से पहले ही पहुच जाता है ओर वह हिट पर आ जाती है। यदि उसे 2 या 3 बार के बाद भी गाभीन नही कीया तो इन्फेक्सन होने का डर रहता है जीसके चलते हम उसे परिपक्वता पर पहुचने से पहले ही गर्भधारन करवा देते है। इसका परिणाम उस गौ को जीवन भर भूगतना पड़ता है। गाभीन होते ही उसका शारिरीक विकास रूक जाता है क्युकि अब उसे अपने बच्चे का भी विकास करना है। शारिरीक विकास न होने से आगे जाके वह कुछ बच्चे जनने के बाद ही बुढ़ी जैसी हो जाती है। बच्चे भी कमजोर आ सकते है। एक छोटी सी अज्ञानता के कारण बहुत बड़ा नुकसान भुगतना पड सकता है।

      हमे आयोजन इस तरह करना चाहिए की गिर गाय की बछड़ी की उम्र 2 से 2.5 वर्ष की हो तब उसका वजन 200 किलो हो। क्युकी अगर उसका वजन कम उम्र मे 200 किलो या उसके उपर जायेगा तो संभावना हे की वह हिट पर आयेगी। अगर सबकुछ सही तरीके से हो तो हमने 21 वे बार गर्भधारन की हुई पूर्ण स्वस्थ्य गीर गाय को भी देखा है।

      यदि इस बात से अवज्ञ होने के कारण गीर गाय की बछड़ी हिट पर आचूकी हो तो गाभीन करने के सीवाय ओर कोई रास्ता नही हे। ज्यादा से ज्यादा एकाद बार जाने दे सकते है लेकीन बार-बार करना ठीक नही।

      हम इसपर ओर भी जानकारी आगे प्रस्तुत करेंगे या हो सके तो आप प्रेक्टिकल गीर गाय के पालन की शिबिर मे आकर ट्रेनिंग भी ले सकते है।

      सूचना- यह नियम वैसे तो सभी भारतीय गौ वंश को लागू होता है परन्तु उम्र और वजन का प्रमाण अलग रहता है।

      इसके अलावा यदि आपका कोई ओर प्रश्न हो तो आप यहाँ जरूर पूछे नही तो आगे ओर भी बड़ा नुकसान हो सकता है।

      आभार

      Reply
  18. विजय पाटीदार says:

    सर जी म.प्र. मे कहा मिल सकती है गीर गाय

    Reply
    • Gadadhar Das says:

      नमस्ते विजय पाटीदार जी,

      गिर गाय की जानकारी प्राप्त करने के लिए आपने हमें संपर्क किया उसके लिए आपका धन्यवाद।

      वैसे तो गिर गाय गुजरात के सौराष्ट्र पार्ट मे पाई जाती है। सौराष्ट्र के अलग-अलग जिले जैसे कि वांकानेर, राजकोट, भावनगर, सुरेंद्रनगर, अमरेली, जूनागढ़, पोरबंदर या जामनगर – यह सभी इलाकों में आपको गिर गाय देखने को मिल जाएगी। सालों पहले कुछ लोग जो गुजरात से गिर गायकों राजस्थान, मध्यप्रदेश या तो महाराष्ट्र के तरफ ले कर गए हैं तो अभी भी आप गिर गाय को इन इलाकों में देख सकते हैं। गुजरात के जिन इलाकों के बारे में मैंने आपको बताया उसके अतिरिक्त अगर किसी और इलाकों में अगर गिर गाय पाई जाती है तो उसमें काफी हद तक यह संभावना है कि वह शुद्ध नस्ल की ना हो। हो सकता है कि वह डाउनग्रेड हो या तो कांकरेज गौ वंश के साथ या तो किसी और लोकल गौ वंस या पशु के साथ क्रॉस हुई हो तो सावधान रहे।

      कृपया आप से मेरा नम्र निवेदन है कि जब भी आप गिर गाय खरीदने के लिए जाए या आपको किसी वेबसाइट से कोई संपर्क हो या WhatsApp नंबर से कुछ इमेज प्राप्त हुई हो या आपने कहीं इंडिया ट्रेड माट या तो कोई यूट्यूब वीडियो या तो कोई वेबसाइट से कोई जानकारी प्राप्त की हो या संपर्क नंबर प्राप्त किया हो, आप उनसे खरीदने की बातचीत कर रहे हो तो सावधान रहें क्योंकि इसमें काफी हद तक चीटिंग होने की संभावना है।

      आज भी कुछ लोग, उनके पास उपलब्ध क्रोस हुई या डाउन ग्रेड हुई गिर गाय को गुजरात से लाई हुई गिर गाय बताकर उच्च दामों में बेच देते हैं। जो भी इनको खरीद करता है वह अनुभवी ना होने के कारण निश्चित तौर पर लोस करेगा। सायद कुछ समय के बाद पूरे प्रोजेक्ट को बंद कर देने की भी नौबत आकर खड़ी हो जाये।

      आपसे मैं नम्र विनती करूंगा कि गिर गाय खरीदने में जल्दबाजी ना करें। गिर गौ पालन के बारे में जो भी जरूरी जानकारी होनी चाहिए वह पहले जान लें। कुछ अनुभवी मित्रों से भी मिले, प्रश्न पूछें, यह जाने कि उनको गीर गाय के पालन में क्या-क्या दिक्कतें आई, किन-किन मुसीबतों का उनको सामना करना पड़ा … यह सब जानकारियाँ प्राप्त करना बहुत ही जरूरी है क्योंकि इसके बिना आप चाहे कितना भी प्रोफिट देनेवारा कागझी प्लान तैयार करे ले फिर भी प्रोजेक्ट फ्लॉप होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

      ज्यादा जानकारी के लिए आप हमे वाट्सएप पर कभी भी संपर्क कर सकते है (89798 92588).

      अपनी मेहनत की कमाई को बिना सोचे समझे इन्वेस्ट न करे नहीं तो पैसा तो डूबेगा साथ ही हमारी अज्ञानतावश गौ वंश को भी काफी परेशानियां होगी। यही नही, समाज को एक ओर उदाहरण मिल जाएगा जो दूसरे पशुओं के पालन के हितैषी है।

      आभार।

      Reply
  19. Alok Singh says:

    aapka jawab padhkar bahut achha laga….humko bhi gir govansh ko aage badhana hai,, aapki madad chahiye…WhatsApp no 8004090906

    Reply
    • Gadadhar Das says:

      नमस्ते आलोक जी,

      आपको सहयोग करने मे हमे बड़ी प्रशन्नता होगी।

      यदि हम सब व्यक्तिगत रूप से अपने आपको सक्षम करे तो निश्चित तौर पर बहुत ही नजदीक के भविष्य मे हमारे भारतीय गौ वंश का संवर्धन करके उच्च श्रेणी के गौ वंश की वृद्धि कर पायेंगे। केवल गिर नश्ल के गौ वंश ही नही ओर भी भारतीय गौ वंश का संवर्धन होना बहुत ही आवश्यक है।

      कृपया हमे बताये, हर संभव प्रयास करेंगे आपको सहयोग करने मे…

      आभार

      Reply
    • Gadadhar Das says:

      नमस्ते दर्शन जी,

      सामान्यतया, एक गिर गाय को गीर गौशाला मे आराम से रखने के लिए 75 से 100 चोरस मीटर जगा उपयुक्त होती है। इसमे गाय के घासचारे कि गमान एवं पानी की व्यवस्था भी हो जायेगी।

      गोशाला एवं अन्य वस्तुओ के लिए क्या क्या व्यवस्था कहा पर करनी चाहिए एवं अन्य ओर कई चिजो के बारे मे जानकारी के लिए आप “पंचभूत आधारित गौशाला निर्माण कैसे करे” से प्राप्त कर सकते है।

      यदि आपको गिर गाय पालन से जूड़ी अन्य कीसि विषय वस्तु के बारे मे जानकारी चाहिए तो कृपया यहा पूछ सकते है।

      आभार।

      Reply
    • Gadadhar Das says:

      जी हा, गिर गाय का पालन राजस्थान मे भी कुछ जगह पर किया जाता है। यदि आपको गिर गाय की जानकारी नही है तो कृपया ध्यान रखे की गीर गाय की किमत इतनी नही होती जितनी आपको बोली जाती है। किशनगढ़ एवं अजमेर के आजुबाजु के कुछ जगह पर कुछ लोग गुजरात से गीर गाय लाके उचे दाम पर बेच देते है। कुछ केस मे चिटिंग भी हुआ है तो कृपया सावधान रहे। आपके पैसे फस सकते है। ध्यान रहे, कभी भी एडवान्स मे 1 हजार या 2 हजार से ज्यादा पैसा ट्रोन्फर ना करे। मोबाईल पर जो गीर गाय के फोटो आपने प्राप्त किये होंगे वैसे ही फोटो ओर भी कई लोगो को भेंजे गये होंगे तो बेचनेवाले का पुरा पता प्राप्त करके व्यक्तिगत रूप से मिलकर, गाय को देख परखकर भी आगे बढ़े। यदि समय का अभाव है तो आपके पैसे दूबने की पूरी संभावना है।

      ओर भी बहुत सारी चिजे है जो आपको जाननी चाहीए। यदि आपकी इच्छा हो तो संपर्क करे।

      धन्यवाद।

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  20. Ritesh Nagar says:

    गिर गाय के सही उम्र की जानकारी कैसे पता की जाती है।कृपया विस्तार में बताएं ।

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    • Gadadhar Das says:

      वैसे गिर गाय का बाजार तो नही होता लेकिन कुछ जगह पर उनके पालन करनेवालो से प्राप्त हो जाती है। यदि आप जानना चाहते है की, गीर गाय कहाँ मिलेगी तो कृपया थोड़ा धेर्य ओर सावधानि से आगे बढ़ीयेगा।

      गीर गाय महाराष्ट्र के पुणे के आजू-बाजू के इलाकों में पाई जाती है। गीर गाय पालने वाले शुगर फैक्ट्री के आजू-बाजू बसते हैं। यहां पर जो गिर गाय आपको प्राप्त होगी, वह इतनी शुद्ध तो नहीं होती है, लेकिन 60-70% भी गीर रहो और एच.फ या जर्सी के साथ कभी भी मिक्स ना की गई हो तो आप गीर गाय खरीद सकते हैं। यदि आप गीर गाय यहां से खरीद करना चाहते हैं तो आपको गिर गाय की पहचान करना आना चाहिए नहीं तो चीटिंग होने के काफी चांसेस है।

      दूसरी जगह है धूलिया, यह जगह भी गिर गाय के लिए काफी फेमस है। यहां पर भी चैटिंग होने के चांसेस सबसे ज्यादा है यदि आपके पास गिर गाय की कोई जानकारी ना हो तो कृपा करके किसी गिर गाय के अनुभवी व्यक्ति को साथ में रखना बहुत ही आवश्यक है।

      आप कहीं भी गीर गाय खरीदने के लिए जाए तो कृपया ध्यान रखें गिर गाय की कीमत इतनी नहीं होती जितनी वह कहते हैं। इसलिए आप को साथ में एक अनुभवी व्यक्ति भी रखना जरूरी है। हमारे काफी मित्र जो गीर गाय की जानकारी के बिना खरीद के केले आए तो काफी कड़वे अनुभव प्राप्त हुए।

      यदि आपका गिर गाय के बारे में और कोई प्रश्न हो तो कृपया हमें बताइए, हम जरूर प्रयत्न करेंगे कि आप की हर प्रश्न जो गिर गाय के लिए है, उसका हम उचित उत्तर दे पाए।

      धन्यवाद ।

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        • Gadadhar Das says:

          नमस्ते राजहंस जी,

          आपने गिर गाय के बारे मे जो प्रश्न पूछा है वह बहूत ही महत्वपूर्ण है।

          ज्यादातर गिर गाय को ख़रीद करने की चाहत रखने वाले व्यक्ति गिर गाय की उपयुक्त जानकारी न होने के कारण चीटिंग का शिकार होते है। उनको यह बताया जाता है की जिस गिर गाय या गिर गाय की बछड़ी का फोटो उन्हे सेर किया गया है वह एक प्योर गीर प्रजाति की गाय या बछड़ी है। गीर गाय की पहचान के बारे मे नये व्यक्ति की समस्या हय होती है की वह यही तय नही कर पाते की फोटो या वीडियो मे जो गाय या बछड़ी है वह सही मे प्योर है? केवल कान लंबे होना, सिंग बड़े होना या कलर लाल होना ही गीर गाय की पहचान नही होती। कई बार ओरिजिनल गीर नंदी से वैसी ही शुद्ध गीर का संवर्धन करने पर भी बछड़े या बछड़ी का कलर, कान या सिंग पूर्ण रूप से अलग प्रकार का पाया गया है। तो यहाँ प्रश्न यह हो ता है की क्या उस अलग बछड़े या बछड़ी को आप गीर नही कहेंगे?

          मूल बात यह है की, सबसे पहले हमे यह समझना पड़ेगा की गीर गाय की पहचान कैसे करे? उसके बाद ही गीर गाय की कीमत तय करने मे सुविधा होगी। आप चाहे तो उपर बताई गई वेबसाइट से सीख सकते है की, गिर कहा से प्राप्त हो सकती है? गिर गाय की कीमत कैसे तय करे? एवं अच्छा दूध देने वाली गिर गाय की पहचान कैसे कर सकते है?

          आपसे विनम्र प्रार्थना है की, गिर गाय की खरीदी जल्दबाजी मे ना करे। कई लोगो के हजारों और लाखों रूपये दूबे है। केवल एक छोटी सी लगती के कारण न केवल आपकी कड़ी मेहनत से कमाया पैसे डूबता है किंतु कई बार अच्छा गौ वंश की बर्बादी का भी कारण बनता है।

          धन्यवाद।
          गदाधर दास
          8979892588

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